Major System = A Tool of Memorize Number

What Is the “Major System”?

One method for memorizing numbers is called the Major System. There are other methods that you can use too, but since the Major System is the most popular, we’re going to stick with it for today. The main idea behind this system for memorizing numbers is to turn the individual digits of a number into consonant sounds, and then to add in vowel sounds to help you turn those consonant sounds into complete words. After that, all you have to do is turn those words into a memorable picture in your mind. If that picture is memorable enough, you won’t forget it!

Then when you need to recall your number just picture that unforgettable mental image, turn the words describing the objects in that image back into consonant sounds, turn those consonant sounds back into digits, and…voilà…you’ve got your number back! Sounds easy, right? Okay, maybe not exactly easy, but at least the idea is pretty straightforward. In practice though using this technique does take some…well…practice. So let’s go step-by-step through the process and see how it all works.

How to Turn Digits Into Letters

The first step is to turn the individual digits in your number into consonants. Each of the numerals from 0 through 9 receives its own letter. There are lots of ways you can do this (and you should feel free to make up your own), but here’s one common way to do it that’s described on Wikipedia:

  • 0 → “z” or “s” since “z” is the first letter of “zero” and “s” kind of sounds like “z”
  • 1 → “d” or “t” since they’re both written with 1 vertical line (just like the numeral 1) and they have a similar consonant sound
  • 2 → “n” since it’s written with 2 vertical lines
  • 3 → “m” since it’s written with 3 vertical lines and actually looks like a sideways “3”
  • 4 → “r” since it’s the last letter of “four” and since “4” and “R” are almost mirror images of each other
  • 5 → “L” since “L” is the Roman numeral for 50 (which at least has a 5 in it)
  • 6 → “j”, “sh”, “ch”, “jh” or soft “g” since a script “j” has a lower loop like a 6, “sh” and “ch” sound kind of like a “j,” and a “g” looks like an upside-down 6
  • 7 → “k” hard “g” or “q” since a capital “K” looks like two mirror-image number “7s” back-to-back, and because hard “g” and “q” kind of sound like “k”
  • 8 → “f”, “w” or “v” since a fancy cursive “f” looks a bit like an “8” and because “v” sound a lot like “f”
  • 9 → “b” or “p” since “p” is a mirror-image of 9 and “b” sounds a lot like “p”

Okay, as you can see, some of these are kind of a stretch…but they do all make at least some sense and serve as pretty good mnemonics. Of course, this list is a lot to remember. Which means you aren’t going to become an expert at this technique by simply reading through the list once. Learning to memorize numbers will take some work, and that work begins by learning to use your own set of conversions (or the ones we just talked about) to turn numbers into consonants.

 

Learn the first part of a memory trick that will help you turn numbers into mental pictures so that you can remember them forever,

 

Anil Phonetic Tool : The Secret  Memorize Numbers   

 

Anil Phonetic Table – Encoding Number to Text

The Secret of Memorize Number …..(A Tool to retain & recall memory long time)

A Tool of retain and recall of any number in mind anytime anywhere in any condition 10X faster then normal.It is helpful to quickly recall your ATM Pin/Credit Card / Bank Account / Passwords/ Passport /License Number/Aadhar Card/Vehicle/PAN/ Law Section/ Years etc. without approach your notebook or diary.
How does happen , Please see this article and follow next step :
यह एक ऐसी तकनीक है जिसके द्धारा हम किसी भी नम्बर को आसानी से याद रख सकते है. इस तकनीक मे हम Digits को Words मे Convert कर देते है और Words को Image मे, और Image को हम Visualization तकनीक द्धारा Related विषय से Associated कर देते है. और जब भी वह Number हमे Recall करना होता है, तब उस शब्द को पुनः Number मे Decode कर देते है. इसे फोनेटिक (Phonetic) नम्बर सिस्टम भी कहते है
आइए जानते है यह काम कैसे करता है……..
यह किसी भी अंको (Numbers) को उच्चारण (Pronunciation) मे परिवर्तित कर देता है, यह उच्चारण हमारे दिमाग मे उस शब्द का एक चित्र बना देता और जिसे हम जब चाहे तब आसानी से पुनः स्मरण (Recall) कर सकते है…..
हमारे मस्तिष्क की सबसे बड़ी खास बात है की यह किसी भी  ध्वनि (Sound) और चित्र (Image) को जल्दी पकड़ता  है और लंबे समय तक हमारी स्मृति मे बनाये रखता है , बजाय कही लिखे हुए शब्दो को पढने और समझने के.
उदाहरण के लिए …इतिहास विषय काफी बच्चो को निरस (Boring)  विषय लगता है. इतिहास की पुस्तक अगर किसी को दे दी जाये तो पढ़ते पढ़ते उसी जल्दी नींद आ जाती है. अगर यही इतिहास महाभारत , रामायण, चंद्रकांता, टीपू सुल्तान , रानी लक्ष्मीबाई , शिवाजी जैसी मूवीज मे परिवर्तित कर के टी. वी. पर दिखाई जाये तो ..हम सब बड़ी ही रूचि से घंटो इसी इतिहास को जानने मे उत्सुकता बताते है…
इसका अर्थ यही है की कोई भी विषय उबाऊ नहीं होता , सिर्फ हमारा देखने का या पढ़ने का तरीका गलत होता है, अगर हम अपनी कुछ सृजनात्मक शक्ति से इसे मनोरंजन तरीके मे परिवर्तित कर दे तो किसी भी विषय को आसानी से लंबे समय तक याद रखा जा सकता है…यह हमारे विज्ञानं ने भी साबित कर दिया है, जिसे हम NLP (Neuro Liguistic Programming) की सहायता से हमारे दिमाग मे स्थायी रूप से प्रोग्राम कर सकते है.
  
किसी भी विषय को लंबे समय याद रखने के लिए दिमाग को चाहिए की……
१  वह कुछ चटपटा हो , अजब गजब हो ….क्योकि कोई भी असमान्य या बेढंग की  चीज़ हमारा दिमाग पसंद भी करता है और लंबे समय तक याद भी रखता है (Ridiculous)
२  वह हमसे या हमारी जिंदगी से किसी न किसी रूप मे जुड़ा हो (Associated)
३  उसे आसानी से कही भी , कभी भी , किसी भी रूप मे महसूस किया जा सके (Implemention)
किसी पदार्थ के रूप मे, संगीत के रूप मे या किसी बहुत बड़ी घटना के रूप मे जिसे भुलाये ना जा सके
४ वह आसानी से हमारी बंद आँखों के द्धारा देखा जा सके अर्थात उसे Visualize किया जा सके.
 
आइये जानते और समझते  है इस सूत्र को जिसके द्धारा हम अंको को शब्दो मे परिवर्तित करके उसे हमारे दिमाग मे लंबे समय तक बिना किसी भ्रम या गड़बड़ी के आसानी से रख सकते है.
हम सभी जानते है की  0 से 9 तक अंक होते है, अंग्रेजी भाषा मे 26 अक्षर , हिंदी भाषा मे 36 अक्षर  (व्यंजन)  और 13  स्वर होते है. इन्ही शब्दो की भाषा से हम किसी भी चीज़े को बुलाते है , सोचते है , देखते है , गुनगुनाते है , महसूस करते है, अहसास करते है और किसी को समझाते है.
NLP (Neuro Liginusitic Programming) की सहायता से आज हम एक ऐसी भाषा सीखने जा रहे है जो असामान्य है , अजीब गरीब है , चटपटी है , रुचिकर है और सबसे बड़ी बात हमारे स्मरण योग्य  है .
आपने कभी कार्टून मूवी , पेंटिंग , फिल्म , खिलौने देखे होंगे , इन सभी मे कही न कही दिमाग का यह अजीब सा फार्मूला काम आता ही है…..तो चलिए रूबरू होते है, इस फॉर्मूले से……
Anil Phonetic Table – Encoding Number to Image
Tool of Retain & Recall Memory :